देवलाली का इतिहास

देवलाली वर्ग-१ की छावनी है जिसकी वर्ष १८६९ में स्थापना हुई. यह २०० फिट उपर पठार पर स्थित है तथा सह्याद्री के सुरम्य पर्वतमालाओ से घेरा हुई है | मध्य रेल लाइनों पर मुंबई से २०० की. मी पर दूर है तथा समुद्र तल से ५५६.५२ मीटर ऊपर है | देवलाली छावनी नाशिक जिले में है जो की अखिल भारतीय हिंदु तीर्थाटन केंद्र है | देवलाली छावनी दारना नदी के किनारे पर स्तिथ है तथा सह्याद्री के पर्वतमालाओ में इगतपुरी और त्र्यम्बक के पहाड़ो में नैसर्गिक स्तिथि प्राप्त है | देवलाली यह एक बहुतही लोकप्रिय हिल स्टेशन है तथा महाराष्ट्र राज्य का आरोग्य विश्राम स्थल है | देवलाली मैं काफी सेनिटोरियम है जिसमें से जादातर गुजराथी तथा पारसी संप्रदाय द्वारा निर्मित है | देवलाली कैम्प वर्ष १८७० में आगमन तथा प्रस्तान हेतु मुख्य डेपो के रूप मैं शुरू कर दिया गया था | यहाँ पर १९०४ में इंडियन स्टाफ कॉलेज की निर्मिती हुई | इस पश्चात वह क्वेट्टा जो की अब पाकिस्तान में स्तालान्तरित कर दिया गया है | पहले जागतिक युद्ध के दरम्यान देवलाली का विस्तार हुआ जब कई प्रशिक्षण कैम्प तथा अस्पताल जोड़े गए |

छावनी परिषद कार्यालय

छावनी परिषद कार्यालय के वर्तमान भवन छावनी परिषद देवलाली द्वारा १  अक्टूबर १९३५  को रु.५०००/- में खरीदा गया था. हालांकि, मूल भवन ब्रिटिश सैनिकों के लिए एक कैंटीन था.  कैंटीन भवन के निर्माण के आवश्यकता के लिए क्यू एम जी द्वारा जनवरी १८६८  में पेश किया गया था जो बंबई की सरकार उनके संकल्प संख्या ८०४ दिनांक १३ जुलाई १८६८ द्वारा स्वीकार में कोई कर लिया गया था. लेकिन योजना बहुत बाद में अनुमोदित किया गया था और रु.२८२८६/- के लिए कार्य वित्तीय वर्ष १८७३-७४ में शामिल होने का आदेश दिया गया था. अंततः कार्य के लिए रुपए २३९८८  मंजूर किया गया था. बाद में, योजना में एक कॉफी की दुकान जोड़ा गया और श्री सोराबजी दोसभोय द्वारा प्रस्तुत की गई रुपये २५५९४/- के लिए निविदा स्वीकार कर लिया गया. भवन का निर्माण १८७३ में किया गया था. अब इस भवन में छावनी परिषद कार्यालयों, देवलाली हैं. इस भवन  में दिनांक १ दिसम्बर १८८३ को दोपहर ३ से ४ बजे के बीच बड़ी आग लगी थी जिसके कारण उत्तरी आधा, कॉफी शॉप, कैंटीन कक्ष आदि नष्ट हो गया.